Friday, 1 September 2017

THE OXYGEN

                         THE OXYGEN






प्राणवायु अर्थात आक्सीजन ही वह मूल तत्व है जो प्रतेयक प्राणी के जीवन का आधार है । प्राण के कारण ही किसी भी जीवधारी में चैतन्यता अथवा जीवंतता आती है । यही वह मूल तत्व है जो स्वयं तो अक्रिय है किन्तु जो ब्रह्मांड के समस्त जड़ तथा चेतन पदार्थों को सक्रियता प्रदान करता है । यह पंच महाभूतों = पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , तथा आकाश जिनके संयोग से ब्रह्मांड का निर्माण हुआ है , में तथा जिनके संयोग से शरीर का निर्माण हुआ है, सभी में व्याप्त है जैसे -
पृथ्वी = ऑक्सीजन +नाइट्रोजन + कार्बन + हाइड्रोजन 
अग्नि = ऑक्सीजन + कार्बन 
वायु = ऑक्सीजन + नाइट्रोजन + कार्बन डाइऑक्साइड 
जल = ऑक्सीजन + हाइड्रोजन 
आकाश = ऑक्सीजन सहित समस्त वायुविव तत्वों कि गति का आश्रय स्थल है । हमारे शरीर कि प्रतेयक कोशिका के निर्माण कि सरंचना में ऑक्सीजन कि अहम् भूमिका है । शरीर का दो तिहाई भाग केवल ऑक्सीजन से ही निर्मित है 
  ऑक्सीजन शरीर कि समस्त क्रियायों तथा प्रतिक्रियों (Metabolism) में सक्रीय भाग लेता है । प्राणायाम के द्वारा प्राण जितना ही सूक्ष्म होता जाता है , उतनी ही इसकी शक्ति बढ़ती जाती है । 
वायु मंडल को ऑक्सीजन विहीन कर देने से ब्रह्माण्ड के सभी क्रियाकलाप स्थिर हो जायेंगे । सब कुछ स्वतः समाप्त हो जायेगा । जहाँ ओक्सीजनः नहीं वहाँ जीवन नहीं । अतः वह मूल तत्व , जो समस्त प्राकृतिक शकितयों में मौजूद है, जिससे समस्त जीवधारियों में चेतना का

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